Wednesday, December 22, 2010

कहा बाड़ भगवन तनी एक बार आव

ई एगो कविता बा जवान हम रौआ सभे के सामने रख तानी . आशा बा की अच्छा लागी .

कहा बाड़ भगवन तनी एक बार आव
आपन दरस तनी सबके देखाव

देख तोहरा दुनिया के का हो गली बा
जे रहे केतना सीधा उ टेढ़ा हो गइल बा

लागत्ता न सुधरी अब तोहर इ दुनिया
लजात अब नइखे काहें, देख ललमुनिया

ना माई के सुने ना बाप से डराए
और भाई के इज्जत के मिटटी में milaye,

कहे बाप से हम अब माडर्न हो गइल बानी
राउर वक़्त अब हो गइल बा एगो बितल कहानी ,

का इतना टाइम आगे हो गइल बा
की शर्म लाज , इज्जत अब सब खो गइल बा ?

अरे भगवन एक बार तनी तुन्हू आव
हे नादान के तुहूँ आके बताओ

की बहुत दिन ना रही इ नादान जवानी
इ उम्र के ना कही देख बन जाये कहानी

इ ता रहे देख भगवन उमर के नादानी
पर इ देख तू तनी एगो भौजी के कहानी,


माथा के आँचल भौजी अब सिर से गिरावेली
पति के अब देख उ डार्लिंग बुलावेली

सासु अम्मा देख अब आंटी हो गइल बाड़ी
पतोहिया के देख अब उ धोयेली साड़ी

बेटा ना सुने अब माँ के कौनो बात
बाप के भी दिखा देले कुछ ता उनकर औकात

का भगवन का बाकी बा अब देखे के तोहरा
कहे तू अब करतार ऐ पापन के पहरा,


अरे अपना दुनिया के कुछ ता सिखाव
ना ते ऐ दुनिया के मिटटी में मिला


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