Thursday, December 23, 2010

सब केहू भूखल बा

सब केहू भूखल बा
केहू खिदमत केहू हिमायत
केहू इबादत के भूखल बा
जे बंदिश के दायरा में बा
उ इनायत के भूखल बा,

देखीं गौर से त ई सुनसान सहर बा
इन्शानियत के जनाजा पर बरसत कहर बा

ऐ कहर के लात से जेकर अरमान कुचल गइल बाटे
अपना अरमान के साथै उ भगवान से भी रूठल बा
काफिला से आज जेकर साथ छुटल बा
रोअत बिलखत याद से ओकर साथ जुटल बा

बचल बा जे ऐ शामत से उ खुदा के दुआ के भी भूखल बा
ओकरा खातिर त आज समन्दर भी सुखल बा
उ खिदमत , हिमायत और इबादत के भूखल बा,
उ त आज सब के नजर ऐ इनायत के भूखल बा ..............................



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